०२ – दो

पहली रात मैं रेगिस्तान की रेत पर सोया। मैं इंसानों की दुनिया से हज़ार मील दूर था। मुझे पूरा यकीन था कि वहाँ मेरे आस-पास कोई नहीं है। लेकिन अगली सुबह कुछ अजीब हुआ। किसी की आवाज़ आई, “कृपया, मेरे लिए एक भेड़ बनाओ।”

“क्या?” मैंने चौंककर पूछा।

“मेरे लिए एक भेड़ बनाओ!”

मैं तुरंत उठ बैठा। मैंने चारों ओर देखा और वहाँ मुझे एक छोटा लड़का दिखा।

यह रहा उस छोटे लड़के का चित्र।

मैंने जो चित्र बनाया वह बहुत अच्छा नहीं था। असली लड़का उससे बेहतर दिखता था। यह मेरी गलती नहीं थी, क्योंकि मैं सिर्फ़ दो चीज़ें बनाना जानता था — साँप बाहर से और साँप अंदर से।

मैं उस छोटे लड़के को देखता रहा। मैं बहुत हैरान था। मत भूलिए कि मैं रेगिस्तान के बीचोंबीच था, हज़ार मील दूर किसी भी इंसानी बस्ती से। फिर भी यह बच्चा न थका हुआ था, न भूखा, न प्यासा, और न ही डरा हुआ। वह खोया हुआ भी नहीं लग रहा था। वह बस धीरे से बोला, “कृपया, मेरे लिए एक भेड़ बनाओ।”

यह सब मेरे लिए बहुत अजीब था। मेरा हवाई जहाज़ टूटा हुआ था, और मेरी हालत गंभीर थी। फिर भी मैंने अपनी जेब से कागज़ और पेंसिल निकाली और कुछ बनाने की कोशिश की। लेकिन मुझे याद आया कि मैं तो बस भूगोल, इतिहास, गणित और व्याकरण जानता हूँ। मैंने कहा, “मुझे चित्र बनाना नहीं आता।”

उसने जवाब दिया, “कोई बात नहीं। मेरे लिए एक भेड़ बनाओ।”

अब मैं भेड़ बनाना नहीं जानता था, तो मैंने वही चित्र बनाया जो मैं हमेशा बनाता हूँ — एक बड़ा साँप बाहर से।

जब मैंने चित्र दिखाया तो वह बोला, “नहीं, मुझे हाथी के साथ बड़ा साँप नहीं चाहिए। वह साँप बहुत खतरनाक है, और हाथी तो बहुत बड़ा है। जहाँ मैं रहता हूँ वहाँ सब कुछ बहुत छोटा है। मुझे एक भेड़ चाहिए। बस एक भेड़ बनाओ।”

तो मैंने भेड़ की एक तस्वीर बनाई।

उसने देखा और कहा, “नहीं, यह भेड़ बीमार लगती है। एक और बनाओ।”

मैंने दूसरी कोशिश की।

वह मुस्कराया और बोला, “तुम देख नहीं रहे? यह एक मेंढ़ा है — इसके सींग हैं।”

मैंने तीसरी बार कोशिश की।

लेकिन उसने कहा, “यह भेड़ बूढ़ी लगती है। मुझे ऐसी भेड़ चाहिए जो लंबे समय तक जी सके।”

अब मैं थोड़ा परेशान हो गया था। मुझे अपना हवाई जहाज़ भी ठीक करना था, इसलिए मैंने एक डिब्बा बना दिया।

मैंने कहा, “यह एक डिब्बा है। भेड़ इसके अंदर है।”

तभी उसके चेहरे पर चमक आ गई। उसने कहा, “बस यही चाहिए था! क्या तुमको लगता है कि इस भेड़ को ज़्यादा घास चाहिए?”

मैंने पूछा, “क्यों?”

उसने जवाब दिया, “क्योंकि जहाँ मैं रहता हूँ, वहाँ सब कुछ बहुत छोटा है।”

मैंने कहा, “मुझे लगता है कि वहाँ की घास इस छोटी भेड़ के लिए काफी होगी।”

वह डिब्बे को ध्यान से देखता रहा और बोला, “यह भेड़ छोटी नहीं है। यह बहुत ही प्यारी भेड़ है।”

यही मेरी उस छोटे राजकुमार से पहली मुलाक़ात थी।हफ्ते का पानी बचा था।


अभ्यास करें

४ – आपके बारे में

ये सवाल आपके लिए हैं। आप इनके जवाब अध्यापक के साथ बोल सकते हैं या कॉमेंट्स सेक्शन में लिख सकते हैं।

  1. अगर आपके पास एक भेड़ होती, तो आप उसका क्या नाम रखते / रखतीं?
  2. छोटे राजकुमार को आख़िरी तस्वीर क्यों पसंद आई?
  3. अगर आप रेगिस्तान में होते / होतीं, तो आप क्या करते / करतीं?

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